Amitabh Bachchan Biography in Hindi Janye Sab Kuch, Life Story, Career

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Amitabh Bachchan Biography in Hindi :- सदी के महानायक कहे जाने वाले Amitabh Bachchan आज किसी भी पहचान के मोहताज नहीं है. अपनी जिन्दगी में कठिन दिन देखने वाले Amitabh Bachchan ने जिन्दगी में सफलता के उचतम शिखर को छुआ है. आज वह हम सभी के लिए सफलता की मिसाल है. हर कोई उनकी सफलता के उधाहरण देता है लेकिन ऐसा नहीं है की यह सफलता उन्हें रातो रात हासिल हो गयी या किसी जादुई छड़ी से वह इस मुकाम पर पहुँच गये . इसके पीछे Amitabh Bachchan का काफी संघर्ष और असफलताओं का झोला भी छुपा है.

 

 

Amitabh Bachchan Biography in Hindi

 

 

 

परिचय

11 अक्टूबर 1942 में मशहूर लेखक श्रीहरिवंश राय बच्चन के घर जन्मे अमिताभ बच्चन का नाम पहले इन्कलाब रखा गया क्योंकि उनके जन्म के समय इन्कलाब जिंदाबाद का नारा जोरों पर था जिसे सुमित्रानंदन पन्त ने बदलवा कर Amitabh Bachchan रखवा दिया. अमिताभ की माँ तेजी बच्चन ग्रहिणी थी लेकिन उनकी रूचि हमेशा से ही नाटकों में अदाकारा के तौर पर काफी रही जिसे वह घर सम्भालने के कारण पूरा नही कर सकी. अमिताभ के छोटे भाई का नाम अजिताभ बच्चन है. शिक्षा की बात करें तो अमिताभ ने दो बार एम् ए की डीग्री हासिल की है. 1973 में अमिताभ की शादी अभिनेत्री जया बच्चन से हुयी जिनसे इनके एक बेटी श्वेता और बेटा अभिषेक बच्चन हुए.

Amitabh Bachchan Biography in Hindi | असफलता से सफलता की ओर

 

बॉलीवुड में कदम रखने से पहले अमिताभ ने रेडियो में नौकरी के लिए कोशिश की लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी और अपमान भी सहना पड़ा. जब Amitabh Bachchan रेडियो में इंटरव्यू के लिए गये तो उन्हें वहां उनकी भारी आवाज के कारण अपमानित कर दिया गया और नौकरी नहीं दी गयी.

Amitabh Bachchan की जिन्दगी में अभी काफी मेहनत और असफलताए देखना लिखा था जिसके कारण उन्होंने कई बार प्राइवेट नौकरी भी की लेकिन वह उन सभी नौकरियों में खुद को सहज महसूस नहीं करते थे और उनके मन में हमेशा से ही एक्टिंग के लिए जगह थी जिसके कारण उन्होंने बड़ा कदम उठाते हुए नौकरी को छोड़ने का मन बनाया और 1968 में वह बम्बई चले गये. जिसके बाद उनके जानकार ने उनकी कुछ तस्वीरें अहमद अब्बास के पास भिजवाई. अहमद अब्बास अमिताभ के परिवार के बारे में अनजान थे और उन्होंने उन्हें फिल्म में रोल देने के लिए हाँ कर दी और एक मुसलमान का रोल 5000 रूपये की शर्त के साथ मंजूर कर दिया.


जब अमिताभ कागजी कार्यवाही के लिए अहमद अब्बास के पास दोबारा पहुचे तो उन्हें उनके पिता हरिवंशराय बच्चन के बारे में पता चला जिसके बाद अब्बास ने उन्हें यह रोल उनके पिता की आज्ञा के बिना देने से इनकार कर दिया. अमिताभ ने उस समय अपने पिता से इस रोल के लिए मंजूरी ली जिसके बाद वह इस रोल को निभा पाए. Amitabh Bachchan को अपने पहले काम के लिए मीना कुमारी से काफी प्रशंसा मिली. लेकिन दुःख की बात यह हुयी की वह फिल्म फ्लॉप हुयी और किसी ने भी देखना पसंद नही किया.

मॉडलिंग को ठुकराया

 

अमिताभ को उस दौरान मॉडलिंग के कई ऑफर मिलते रहे लेकिन उनका उस क्षेत्र में कोई ध्यान नहीं था. जिसके बाद अमिताभ ने विज्ञापनों में छोटा मोटा काम करना शुरू किया जहां वह अपनी आवाज में डब किया करते थे और उन्हें उसके 50 रूपये मिल जाते जिनसे वह टूटे हुए बिस्कुट खरीद कर गुजारा करते.

धीरे धीरे अमिताभ को फिल्मो में छोटे रोल के साथ मौके मिलने लगे लेकिन परेशानी यह थी की वह कोई भी फिल्म धमाल मचाने में सफल नहीं थी और न ही अमिताभ की कलाकारी लोगों के सामने आ पा रही थी. जिसके कारण अमिताभ काफी परेशान रहने लगे.

मेहनत और कुछ करने के जूनून में अमिताभ को लगभग 3 साल के बाद एक सुनहरा मौका आनंद फिल्म में मिला जिसमे उन्होंने काम किया और वह फिल्म काफी प्रशंसा बटोरने में सफल हुयी. इस फिल्म के लिए अमिताभ को पुरस्कार भी मिला. लोगों ने अब उन्हें पहचानना शुरू कर दिया था लेकिन सफलता उन्हें जंजीर फिल्म में दमदार अभिनय के बाद से मिली. अब अमिताभ अपनी पहचान बना चुके थे और एक के बाद एक बेहतरीन फिल्म कर रहे थे लेकिन Amitabh Bachchan की जिन्दगी में एक दौर ऐसा भी आया जब सभी को अपने इस प्यारे कलाकार को हमेशा के लिए खो देने का डर भी लग गया.

मौत को मात

 

दरअसल , 1982 में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ चोटिल हो गये और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी चोट को बेहद गम्भीर बताया गया जिसके कारण उनका काफी लम्बा इलाज चला. अपने फैन्स की दुआओं के चलते अमिताभ स्वस्थ हो कर एक बार फिर वापस आये लेकिन फिल्मों के लिए अब उनके मन में एक भय बैठ चूका था जिसके कारण वह राजनीती की ओर निकल पड़े.

हालाँकि राजनीति में अमिताभ को कोई लगाव नहीं था जिसके बाद वह फिर फिल्मों में वापस आये और अपने काम पर ध्यान देने लगे. Amitabh Bachchan ने सिर्फ फिल्मो में ही नहीं टीवी प्रोग्राम में भी अपना हाथ अजमाया और कौन बनेगा करोडपति को नये नुकाम पर ले गये.

अमिताभ आज अपनी जिन्दगी में सफल है और हम सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है. एक इंटरव्यू के दौरान अमिताभ ने अपनी जिन्दगी के पन्नों को पलटते हुए सभी नौजवानों को कभी न हारने और अपने लक्ष्य की ओर ध्यान केन्द्रित करने की सीख दी.

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